६७. भारतीय गवर्नर
1. हिन्दुस्तानी गवर्नर को चाहिये कि वह खुद पूरे संयम का पालन करे और अपने आस- पास संयम का वातावरण खडा़ करे। इसके बिना शराबबन्दी के बारे में सोचा भी नहीं जा सकता।
2. उसे अपने में और अपने आस-पास हाथ- कताई और हाथ- बुनाई का वातावरण पैदा करना चाहिये, जो हिन्दुस्तान के करोडो़ गूगों के साथ उसकी एकता की प्रकट निशानी हो, ‘मेहनत करके रोटी कमाने’ की जरूरत का और संगठित हिंसा के खिलाप- जिस पर आज का समाज का टिका हुआ मालूम होता है- संगठित अहिंसा का जीत- जागता प्रतीक हो।
3. अगर गवर्नर को अच्छी तरह काम करना है, तो उसे लोगों की निगाहों से बचे हुए, फिर भी सबकी पहुंच के लायक, छोटे से मकान में रहना चाहिये।ब्रिटिश गवर्नर स्वभाव से ही ताकत को दिखाता था। उसके लिए और उसके लिए लोगों के लिए सुरक्षित महल बनाया गया था- ऐसा महल जिसमें वह और उसके साम्राज्य को टिकाये रखने वाले उसके सेवक रह सकें। हिन्दुस्तानी गवर्नर राजा – नवाबों और दुनिया के रातदूतों का स्वागत करने के लिए थोडी़ शान- शौकत वाली इमारतें रख्ा सकते हैं। गवर्नर के मेहमान बनने वाले लोगों को उसके व्यक्तित्व और आस- पास के वातावरण से ‘ ईवन अण्टु दिस लास्ट ‘ (सर्वोदय) – सब के साथ समान बरताव- की सच्ची शिक्षा मिलनी चाहिये। उसके लिए देशी या विदेशी मंहगे फर्नीचर की जरूरत नहीं। ‘ सादा जीवन और ऊंचे विचार’ उसका आदर्श होना चाहिये। यह आदर्श सिर्फ उसके दरवाजे की ही शोभा न बढा़ये, बल्कि उसके रोज के जीवन में भी दिखाई दें।
4. उसके लिए न तो किसी रूप में छुआछुत हो सकती है और जाति, धर्म या रेग का भेद । हिन्दुस्तान का नागरिक होने के नाते उसे सारी दुनिया का नागरिक होना चाहिये। हम पढ़ते है कि खलीफा उमर इसी तरह सादगी से रहते थे, हालांकि उनके कदमों पर लाखों – करोड़ों की दौलत लोटती रहती थी। उसी तरह पुराने जमाने में राजा जनक रहते थे। इसी सादगी से ईटन के मुख्याधिकारी, जैसा कि मैंने उन्हें देखा था, अपने भवन में ब्रिटिश द्धीपों के लार्ड और नवाबों के लड़कों के बीच रहा करते थे। तब क्या करोड़ों भूखों के देश हिन्दुस्तान के गवर्नर इतनी सादगी से नहीं रहेंगे ?
5. वह जिस प्रान्त का गवर्नर होगा, उसकी भाषा और हिन्दुस्तानी बोलेगा, जो हिन्दुस्तान की राष्ट्रभाषा है और नागरी या उर्दू लिपि में लिखी जाती है। वह न तो संस्कृत शब्दों से भरी हुई हिन्दीं है और न फारसी शब्दों से लदी हुई उर्दू। हिन्दुस्तानी दरअसल वह भाषा है, जिसे विन्याचल के उत्तर में करोड़ों लोग बोलते हैं।
हिन्दुस्तानी गवर्नर में जो- जो गुण होने चाहिये, उनकी यह पूरी सूची नहीं है। यह तो सिर्फ मिसाल के तौर पर दी गई है।
अनुक्रमणिका
- १. मेरे सपनो का भारत
- २. स्वराज्य का अर्थ
- ३. राष्ट्रवाद का सच्चा स्वरूप
- ४. भारतीय लोकतंत्र
- ५. भारत और समाजवाद
- ६. भारत और साम्यवाद
- ७. उद्योगवाद का अभिशाप
- ८. वर्गयुध्द
- ९. हड़ताल
- १०. मज़दूर क्या चुनेंगे?
- ११. अधिकार या कर्तव्य ?
- १२. बेकारी का सवाल
- १३. दरिद्र-नारायण
- १४. शरीर-श्रम
- १५. सर्वोदय
- १६. संरक्षता का सिद्धांत
- १७. अहिंसक अर्थ-व्यवस्था
- १८. सामान वितरण का रास्ता
- १९. भारत में अहिंसा की उपासना
- २०. सर्वोदयी राज्य
- २१. सत्याग्रह और दुराग्रह
- २२. किसान
- २३. गांवों की ओर
- २४. ग्राम-स्वराज्य
- २५. पंचायत राज
- २६. ग्रामोद्योग
- २७. सरकार क्या कर सकती है?
- २८. ग्राम-प्रदर्शनियां
- २९. चरखे का संगीत
- ३०. मिल-उद्योग
- ३१. स्वदेशी
- ३२. गोरक्षा
- ३३. सहकारी गो पालन
- ३४. गांवों की सफाई
- ३५. गांव का आरोग्य
- ३६. गांवों का आहार
- ३७. ग्राम सेवक
- ३८. समग्र ग्राम सेवा
- ३९. युवकों को आह्वान
- ४०. राष्ट्र का आरोग्य, स्वच्छता और आहार
- ४१. शराब और अन्य मादक द्रव्य
- ४२. शहरों की सफाई
- ४३. विदेशी माध्यम की बुराई
- ४४. मेरा अपना अनुभव
- ४५. भारत की सांस्कृतिक विरासत
- ४६. नई तालीम
- ४७. बुनियादी शिक्षा
- ४८. उच्च शिक्षा
- ४९. शिक्षा का आश्रमी आदर्श
- ५०. राष्ट्रभाषा और लिपि
- ५१. प्रान्तीय भाषायें
- ५२. दक्षिण में हिन्दी
- ५३. विद्यार्थियों के लिए अनुशासन के नियम
- ५४. भारतीय स्त्रियों का पुनरूत्थान
- ५५. स्त्रियों की शिक्षा
- ५६. संतति-नियमन
- ५७. काम-विज्ञान की शिक्षा
- ५८ (……..)
- ५९. साम्प्रदायिक एकता
- ६०. वर्णाश्रम धर्म
- ६१. अस्पृश्यता का अभिशाप
- ६२. भारत में धार्मिक सहिष्णुता
- ६३. धर्म – परिवर्तन
- ६४. (…)
- ६५. प्रान्तों का पुनर्गठन
- ६६. अल्पसंख्यकों की समस्यायें
- ६७. भारतीय गवर्नर
- ६८. समाचार-पत्र
- ६९. शान्ति सेना
- ७०. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
- ७१. भारत पाकिस्तान और काश्मीर
- ७२. भारत में विदेशी बस्तियां
- ७३. भारत और विश्वशांति
- ७४. पूर्व का संदेश
- ७५. स्फूट वचन
