७०. भारतीय राष्‍ट्रीय कांग्रेस

इंडियन नेश्‍ानल कांग्रेस देश की सबसे पुरानी राष्‍ट्रीय राजनीतिक संस्‍था है। उसने कई अहिंसक लडा़इयों के बाद आजादी हासिल की है। उसे मरने नहीं दिया जा सकता। उसका खात्‍मा सिर्फ तभी हो सकता है जब राष्‍ट्र का खात्‍मा हो। एक जीवित संस्‍था या तो जीवंत प्राणी की तरह लगातार बढ़ती रहती है या मर जाती है। कांग्रेस ने राजनीतिक आजादी तो हासिल कर ली है, मगर उसे अभी आर्थिक आजादी, सामाजिक आजादी और नैतिक आजादी हासिल करनी है। ये अजादियां चूंकि रचनात्‍मक हैं और भड़कीली नहीं हैं, इसलिए इन्‍हें हासिल करना राजनीतिक आजादी से यादा मुश्‍किल है। जीन के सारे पहलुओं को अपने में समा लेने वाला रचनात्‍मक काम करोडो़ जनता के सारे अंगो की शक्ति को जगाता है।

कांग्रेस को उसकी आजादी का प्रारंभिक और जरूरी हिस्‍सा मिल गया है । लकिन उसकी सबसे कठिन मंजिल आना अभी बाकी है। प्रजातंत्रीय व्‍यवस्‍था कायम करने के अपने मुश्‍किल मकसद तक पहुंचने में उसने अनिवार्य रूप से दलबन्‍दी करने वाले गन्‍दे पानी के गड़हों- जैसे मंडल खड़ें किये हैं, जिनमें घूंसखोरी और बेईमान फैली है और ऐसी संस्‍थायें पैदा हुई हैं जो नाम की ही लोकप्रिय और प्रजातंत्रीय हैं। इन सब बुराईयों के जंगल से बाहर कैसे निकला जाय ?

कांग्रेस को सबसे पहले अपने मेम्‍बरों के उस खास रजिस्‍टर को अलग हटा देना चाहिये, जिसमें मेम्‍बरों की तादाद कभी भी एक करोड़ से आगे नहीं बढी़ और तब भी जिन्‍हें आसानी से शनाख्‍ता नहीं किया जा सकता था। उसके पास ऐसे करोंडो़ का एक अज्ञात रजिस्‍टर इतना बडा़ होना चाह‍िये क‍ि देश के मतदाताओं की सूची में जितने पुरूषों और स्त्रियों के नाम हैं वे सब उसमें आ जायं। कांग्रेस का काम यह देखना होना चाहिये कि कोई बनावटी नाम उसमें शामिल न हो जाय और कोई जायज नाम छूट न जाय। उसके अपने रजिस्‍टर में उन सेवकों के नाम रहेंगे, जो समय- समय पर खुद को दिया हुआ काम रहेंगे ।

देश के दुर्भाग्‍य से ऐसे कार्यकर्ता फिलहाल खास तौर पर शहरवालों में से ही लिये जावेंगे, जिनमें से ज्‍यादातर को देहातों के लिए और देहातों में काम करने की जरूरत होगी। मगर इस श्रेणी में ज्‍यादा और ज्‍यादा तदाद में देहाती लोग ही भरती किये जाने चाहिये।

इन सेवकों से यह अपेक्षा रखी जायेगी कि वे अपने- अपने हलकों में कानून के मुता‍ब‍िक रजिस्‍टर में दर्ज किये गये मतदाताओं के बीच काम करके उन पर प्रभाव डालेंगे और उनकी सेवा करेंगे। कई व्‍यक्ति और पार्टियां इन मतदाताओं अपने पक्ष में करना चाहेंगी। जो सबसे अच्‍छे उन्‍हीं जीत होगी। इसके सिवा और कोई दूसरा रास्‍ता नहीं है, जिससे कांग्रेस देश में तेजी से गिरती हुई अपनी पहले की अनुपम स्थिति को फिर से हासिल कर सके। अभी तक कांग्रेस बेजाने देश की सेविका थी। वह खुदाई खिदमतगार थी- भगवान की सेविका थी। अब वह अपने -आप से और दुनिया से कहे कि वह सिर्फ भगवान की सेविका है- न तो इससे ज्‍यादा है, न कम। अगर वह सत्‍ता हढ़पने के व्‍यर्थ के झगड़ों में पड़ती है, तो एक दिन वह दिखेगी कि वह कहीं नहीं है। भगवान को धन्‍यवाद है कि अब वह जनसेवा के क्षेत्र की एकमात्र स्‍वामिनी नहीं रही।

मैंने सिर्फ दूर का दृश्‍य आपके सामने रखा है। अगर मुझे वक्‍त मिला और मेरा स्‍वास्‍थ्‍य ठीक रहा, तो मैं इन कालमों में यह चर्चा करने की उम्‍मीद करता हूं कि अपने मालिकों – सारे बालिग पुरूषों और स्त्रियों की – नजरों में अपने को उंचा उठाने के लिए देश्‍ा सेवक क्‍या कर सकते हैं।

गांधीजी का आखिरी वसीयतनामा

[कांग्रेस के नये विधान का नीचे दिया जा रहा मसविदा गांधीजी ने 29 जनवरी, 1948 को अपनी मृत्‍यु के एक ही दिन पहले बनाया था। यह उनका अन्तिम लेख था। इसलिए इसे उनका आखिरी वसीयतनामा कहा जा सकता है। ]

देश का बंटवारा होते हुए भी, भारतीय राष्‍ट्रीय कांग्रेस द्धारा मुहैया किये गये साधनों के जरिये हिन्‍दुस्‍तान को आजादी मिल जाने के कारण मौजूदा स्‍वरूप वाली कांग्रेस का काम अब खतम हुआ- यानी प्रचार के वाहन और धारा सभा की प्रवूत्ति चलाने वाले तंत्र के नाते उसकी उपयोगिता अब समाप्‍त हो गई है। शहरों और कस्‍बों से भिन्‍न उसके सात लाख गांवो की दृष्टि से हिन्‍दुस्‍तानी की सामाजिक, नैतिक और आर्थिक आजादी हासिल करना अभी बाकी है। लोकशाही के मकसद की तरफ हिन्‍दुस्‍तान की प्रगति के दरमियान फौजी सत्‍ता पर मुल्‍की सत्‍ता को प्रधानता देने की लडा़ई अनिवार्य है। कांग्रेस को हमें राजनीतिक पार्टियों और साम्‍प्रदायिक संस्‍थाओं के साथ की गन्‍दी होड़ से बचाना चाहिये। इन और ऐसे ही दूसरे कारणों से आखिल भारत कांग्रेस कमेटी के नीचे दिये हुए नियमों के मुताबिक अपनी मौजूदा संस्‍था को तोड़ने और लोक-सेवक- संघ के रूप में प्रकट होने का निश्‍चय करे। जरूरत के मुताबिक इन नियमों में फेर फार करने का इस संघ को अधिकार रहेगा।

गांववाले या गांववालों के जैसी मनोवृत्ति वाले पांच वयस्‍क पुरूषों या स्त्रियों की बनी हुई हर एक पंचायत एक इकाई बनेगी।

पास-पास की ऐसी हर दो पंचायतों की, उन्‍हीं में से चुने हुए एक नेता की रहनुमाई में, एक काम करने वाली पार्टी बनेगी।

जब ऐसी 100 पंचायतें बन जायं, तब पहले दरजे के पचास नेता अपने में से दूसरे दरजे का एक नेता चुनें और इस तरह पहले दरजे का नेता दूसरे दरजे के नेता के मातहत काम करे। दो सौ पंचायतों के ऐसे जोड़ कायम करना तब तक जारी रखा जाय, जब तक कि वे पूरे हिन्‍दुस्‍तान को न ढक लें। और बाद में कायम की गई पंचायतों को हर एक समूह पहले की तरह दूसरे दरजे का नेता चुनता जाय। दूसरे दरजे के नेता सारे हिन्‍दुस्‍तान के लिये सम्मिलित रीति से काम करें ओर अपने- अपने प्रदेशों में अलग- अलग काम करें। जब जरूरत महसूस तब दूसरे दरजे के नेता अपने में से एक मुखिया चुनें, और वह मुखिया चुनने वाले चाहें तब तक सब समूहों को व्‍यवस्थित करके उनकी रहनुमाई करें।

(प्रान्‍तों या जिलों की अन्तिम अभी तय न होने से सेवकों के इन समूह को प्रान्‍तीय जिला समितियों में बाटने की कोशिश नहीं की गई। और, किसी भी वक्‍त बनाये हुए समूहों को सारे हिन्‍दुस्‍तान में काम करने का अधिकार रहेगा। यह याद रखा जाय कि सेवकों के इस समुदाय को अधिकार या सत्‍ता अपने उन स्‍वामियों से यानी सारे हिन्‍दुस्‍तान की प्रजा से मिलती है, जिसकी उन्‍होंने अपनी इच्‍छा से और होशियारी से सेवा की है।)

1. हर एक सेवक अपने हाथ- काते सूत की या चरखा- सेघ द्धारा प्रमाणित खादी हमेशा पहनने वाला और नशीली चीजों से दूर रहने वाला होना चाहिये। अगर वह हिन्‍दू है तो उसे अपने में से और अपने परिवार में से हर किस्‍म की छुआछूत दूर करनी चाहिये और जातियों के बीच एकता के, सब धर्मों के प्रति समभाव के और जाति, धर्म या स्‍त्री- पुरूष के किसी भेदभाव के बिना सबके लिए समान अवसर और समान दरजे के आदर्श में वि श्‍वास रखने वाला होना चाहिये।
2. अपने कार्यक्षेत्र में उसे हर एक गांववालों के निजी संसर्ग में रहना चाहिये।
3. गांववालों में से वह कार्यकर्ता चुनेगा और उन्‍हें तालीम देगा। इन सबका वह रजिस्‍टर रखेगा।
4. वह अपने रोजाना के काम का रेकार्ड रखेगा।
5. वह गांवों को इस तरह संगठित करेगा कि वे अपनी खेती और गृह- उद्योगों द्धारा स्‍वंयपूर्ण और स्‍वावलम्‍बी बनें।
6. गांववालों को वह सफाई और तन्‍दुरूस्‍ती की तालीम देगा और उनकी बीमारी व रोगों को रोकने के लिए सारे उपाय काम में लायेगा।
7. हिन्‍दुस्‍तानी तालीमी संघ की नीति के मुताबित नई तालीम के आधार पर वह गांववालों की पैदा होने से मरने तक की सारी शिक्षा का प्रबंध करेगा।
8. जिनके नाम मतदाताओं की सरकारी यादी में न आ पायें हों, उनके नाम वह उसमें दर्ज करायेगा।
9. जिन्‍होंने मत देने के अधिकार के लिए जरूरी योग्‍यता हासिल न की हो, उन्‍हें वह योग्‍यता हासिल करने के लिए प्रोत्‍साहन देगा।
10. ऊपर बताये हुए और समय- समय पर बढा़ये हुए उद्देश्‍यों को पूरा करने के लिए, योग्‍य कर्त्‍तव्‍य- पालन करने की दृष्टि से, संघ के द्धारा तैयार किये गये नियमों के अनुसार वह स्‍वयं तालीम लेगा और योग्‍य बनेगा। संघ नीचे की स्‍वाधीन को मान्‍यता देगा

1. आखिल भारत चरखा- संघ
2. आखिल भारत ग्रामोंद्योग संघ
3. हिन्‍दुस्‍तानी तालीमी संघ
4. हरिजन-सेवक-संघ
5. गोसेवा- संघ

संघ अपना मकसद पूरा करने के लिए गासंववालों से और दूसरों से चंदा लेगा। गरीब लोगों का पैसा इकट्ठा करने पर खास जोर दिया जायेगा।

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